रविवार का दिन है | शाम के चार बजे हैं | बाहर रिमझिम रिमझिम वारिश हो रही है | रसोईघर में मीना चाय और पकौड़े बना रही है| बच॒चे रवि और किरण बहार पार्क में खेलनें गए हैं | बैठक में बैठा दीपक चाय का इन्जार करते करते अपने कॉलेज के दिनों की यादो में खो गया है |

दिन के अंतिम व्याख्यान के बाद, सभी मित्र कंटीन में बैठे चाय पी रहे हैं | अपना समस्त अन्तिरिम साहस जुटाकर दीपक ने आज मोनिका से अपने प्यार का इजहार करने का मन बना लिया है | मन में बहुत ही संकोच है | अन्तिरिम उल्झन उसे बार बार ऐसा करने से रोक रही है| पर दीपक “आज नहीं तो कभी नहीं” का मन बना कर कैंटीन में प्रवेश करता है | उसका अंतर्द्वंद उसे बार बार बापस आने के लिये कह रहा है पर दीपक साहस बढाकर मित्रों के साथ बैठ जाता है ! मोनिका जो तीन सालो से उसके साथ, इसी कॉलेज में पड़ती है भी साथ में बठी है|

अपनी समस्त हिम्मत जुटाकर दीपक मोनिया से कहता है ” मोनिका मैं आप से बेपनाह मोहब्बत करता हूँ पर यह बात कहने में मुझे तीन साल का वक्त लग गया| मैं आप को उस दिन से प्यार करता हूँ दिस दिन मैंने आपको पहली बार प्रवेश के दौरान देखा था | “

मोनिका एक पल के लिए तो सन्कुचित होती है पर फिर हंस के कहती है “दीपक आप भी ना मजाक बहुत करते हैं“|

दीपक चुपचाप चाय की टेबल से उठकर अपने बिध्यार्थी अवाश की ओर चल पड़ता है| मन में उल्झन है कि कहते है लडकियाँ तो लड़कों की आखें देखकर ही समझ जाती है की लड़का उसे किस नजर से देखता है फिर मोनिका, उसे तीन साल में क्यों नहीं समझ पायी|

उधर मोनिया सोच रही है “दीपक मै जानती हूँ की तुम मुझसे बहुत प्यार कराते हो पर क्या एक संस्कारी लड़की सबके सामने किसी के प्यार को स्वीकार कर सकती है| शायद तुम मुझे तीन
सालों में इतना भी नहीं समझ पाए|

तभी मीना दीपक के कंधो को हिलाते हुए कहती है कहा खो गये आप चाय और पकौड़े ठन्डे हो रहे हैं और बच्चे भी खेलकर आने बाले होगें|

दीपक अपने खयालो से बहार आता है पर “आप भी ना मजाक बहुत करते हैं” की पंक्ति उसके चहरे पर एक ओजस्वी मुस्कान छोड़ जाती है| पत्नी मीना उस मुस्कान को पड़ने में शश्रम है पर क्या एक संस्कारी नारी ऐसी बाते अपने पति से चर्चा कर सकती है| बैसे भी कहते है कि भगवान ने लडकियों को ऐसी सक्ति दी है कि लड़के की आखों को देखकर बता सकती है की वह क्या सोच रहा हैं|

अजब हैं देश के संस्कार और गज़ब है लडकियों की विशेष शक्ति|

*if you remember your college days after reading this short story.. leave a comments and share with world. World is very small, may be it will reaches to whom you could not say ever..

Live every moment of life whether it is good or bad..

अरविन्द कुमार भरद्वाज

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