……………………This is a situational poem……………………

१० एप्रिल रात ११ बजे येसम्येस किसी का आता है
येसम्येस के आते ही मेरी नीद मे विघ्न पढ़ जाता है

रात को मोबाइल उठाने मे मुझे गुस्सा थोड़ा सा आता है
पर मोबाइल उठाते ही नाम सिरी का आता है

नाम सिरी का देखकर गुस्सा थोड़ा कम हो जाता है
यही मेरा फ्रेंड है जो मुझे कभी येसम्येस नही करता है

पता नही आज रात को ११ बजे एक क्यायन क्यो खर्च करता है

मैसेज को पड़ने पर फ्रेंडशिप का मतलब थोड़ा थोड़ा समझ मे आता है
लास्ट की दो लाइनो को समझने मे मेरा वक्त निकता जाता है..

लगातार मैसेज को पड़ने पर उसका मीनिंग समझ मे आता है
मैसेज का मतलब समझ मे आने पर मेरा गुस्सा कम हो जाता है!

अरविंद कुमार भारद्वाज

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