My first Poem devoted to my Guru……..

सदगुरु के दरबार मे कोई खाली ना जाता है
भय, लालच, ईर्षा छोड़ शांति यहा पाता है!

सदगुरु के दरबार मे कोई खाली ना जाता है….
शिझार्थ यहा आता है सेवार्थ यहाँ से जाता है

सदगुरु के दरबार मे कोई खाली ना जाता है….

सेठ यहा आता है, गरीव यहाँ आता है
आकारके यहाँ सवमे नारायण को ही पाता है

सदगुरु के दरबार मे कोई खाली ना जाता है….

कोई संकल्प लिए आता है, कोई विकल्प लिए आता है
परम शांति का अनुभव कर त्रप्त होकर जाता है

सदगुरु के दरबार मे कोई खाली ना जाता है….

मै भी गया था दरबार मे कुछ येहिक संकल्पो को लेकर
पर आया हूँ संसार मे कुछ येहिक विकल्पो को लेकर

यह विकल्प है प्राडी सेवा के, वेदो के व्याख्यान के, देश के उत्थान के

इसीलिए कहा गया है…

सदगुरु के दरबार मे कोई खाली ना जाता है….
जो भी यहा आता है, वह नारायण का बन, विश्व का हो जाता है!!

अरविंद कुमार भारद्वाज

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