ये देश के जवान हैं जो देते अपनी जान हैं!
दूर घरो से रहते हैं ना चिंता उनकी करते हैं

हर पल, पल पल, देश की खातिर उन्हे भुलाये रहते हैं
ये देश के जवान है जो देते अपनी जान हैं……

जब कभी दीवाली आती है,
मिलने की चाह बढ़ जाती है

पर कभी कभी ऐसे मौकों पर छुट्टी उनकी बढ़ जाती है
ये देश के जवान है जो देते अपनी जान है……

ना चाहकर भी ये लड़ते हैं पर देश की राक्ष। करते हैं
जाना था न कभी जिन पर उनको
उस पथ पर आगे पढ़ते हैं

ये देश के जवान हैं जो देते अपनी जान हैं……

पर कभी लड़ाई आती है चिंता उनकी बढ़ जाती है
पर बात सोच आज़ादी की, मिटने की चाह बढ़ जाती है

ये देश के जवान है जो देते अपनी जान है……

एक समय ऐसा आता है प्राङ पखेरू उड जाते हैं
देश की राक्ष। करते करते मिट्टी मे बो मिल जाते हैं

पर जाते जाते मिट्टी से बह यह भी कहते, कहते जाते हैं

अगले जॅनम मे भारत माता छोड़ ना देना मेरा साथ…

ये देश के जवान है जो देते अपनी जान हैं……

अरविंद कुमार भारद्वाज

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