सुना है जवानी सैयानी होती है
एक अनसुनी, अनचुई, अंधेखी कहानी होती है

जब लड़का एक्कीस और लड़की अठारवी मे आते हैं
तो कहा जाता है बे जवानी मे प्रवेश कर जाते हैं

उनके दिलो मे फुसफुसाहट सी होती है
जवानी को करीव से धेखने की चाहत सी होती है
जब किसी लड़के का किसी लड़की की आखों से टकरार होता है
क्या इसी को कहते है पहली नज़र मे प्यार होता है

कभी बे अपने आप को बादलो मे उड़ते पाते हैं
तो कभी समुंद्र की गहराइयों में खो जाते हैं

इस संक्रमंड काल मे उनके शारीरिक संरचना में अनायास ही कुछ ऐसे परिवर्तन हो जाते हैं
जिसे समझपाने मे बे अपने आप को असहाय पाते हैं तथा पेरेंट्स से भी नही कह पाते हैं

यही बह समय है जब हमको अपना करियर बनाना होता है
पर इसी समय पर जीवन साथी के चुनाव को भी आना होता है

जीवन के इस दोराहे पर कभी कभी हम अपने आपको इतना विशाद्ग्रथ पाते हैं
कुछ न कर पाने की इस्तिति मे हम धेखते ही रह जाते हैं

समय के तेज़ी से घूमते चक्र को हम रोक नही पाते हैं
जिंदगी के जद्द्दो जहज़ मे हम यूही खप जाते हैं

पर मेरे विचार से जवानी सयानी नही होती है
एक अनसुनी, अनचुई, अंधेखी कहानी नही होती है

यदि सही से देखा जाए तो यही वह समय है
जब हमारे संयम, धैर्य और शुभ संकल्पों की परीच्छा होती है
जिसमे हमे अपने गुरु, माता, पिता और देश की लाज बचानी होती हैं
यही बह समय हैं जब इंसान को अपने सफल जीवन की नींव बनानी होती है
और यही बह समय हैं जब समय का सदुपयोग कर हमे सफलता पानी होती हैं

अतः हम कह सकते हैं-

जवानी सैयानी नही होती है, यह उम्र का वह पड़ाव जिस पर हमे संयम की लगान लगानी होती है
और जीवन के इसी दौर मे जिंदगी की कहानी बनानी होती है!

अरविंद कुमार भारद्वाज

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